यूपी के आगरा में मंगलवार देर रात आईपीएस अपर्णा सिंह ने 150 पुलिस वालों की टीम के साथ रेड लाइट एरिया ने छापा मारा।

आगरा: यूपी के आगरा में मंगलवार देर रात आईपीएस अपर्णा सिंह ने 150 पुलिस वालों की टीम के साथ रेड लाइट एरिया ने छापा मारा। पुलिस ने मौके से 11 लड़कियों और 5 लड़कों को अरेस्ट कर 4 नाबालिग लड़कियों को तहखाने का ताला तोड़कर रेस्क्यू किया है। यहां नेपाल, बंगाल समेत कई अलग-अलग जगह के लड़के और लड़कियां मौके से मिले हैं। पुलिस इन्हें मानव तस्करी का इंटरनेशनल गैंग बता रही है। एसपी सिटी अनुपम सिंह ने ऑपरेशन में शामिल पुलिस कर्मियों को नकद इनाम और सर्टिफिकेट देने की घोषणा की है।  कश्मीरी बाजार में एक एनजीओ का सदस्य जांच के लिए ग्राहक बन कर वहां गया था। इस दौरान उसको पश्चिम बंगाल की एक नाबालिग ने अपने परिजनों को फोन करने की गुजारिश की, इसके बाद उसने मानवीयता दिखाते हुए लड़की के परिजनों को फोन कर पूरी बात बताई।लड़की का किडनैप होने की रिपोर्ट डेढ़ महीने पहले बंगाल में लिखाई गई थी। बताया जाता है कि लड़की को उसका प्रेमी ही वहां बेच गया था। - जानकारी मिलते ही लड़की के परिजन बंगाल पुलिस को लेकर आगरा आ गए। एसपी सिटी ने इस मामले में कार्रवाई का जिम्मेदारी ट्रेनी आईपीएस अपर्णा सिंह को सौंपी ।
इंजेक्शन के जरिए बढ़ाए जाते हैं हारमोंस
 कम उम्र की लड़कियों को यहां लाकर पेन किलर और हार्मोन के इंजेक्शन दिए जाते हैं, इससे इनका शरीर जल्दी डेवेलव हो जाता है।धीरे-धीरे उन्हें इन इंजेक्शन्स की आदत हो जाती है और वो इस धंधे से निकल नहीं पाती हैं।रेड में पुलिस को भारी तादात में आपत्त‍िजनक सामान और पेन किलर इंजेक्शन भी मिले हैं। इसके अलावा रेड लाइट रेरिया के हर घर में ढेर सारी शराब की खाली बोतलें पाई गई हैं।
ताले तोड़ तहखानों से निकाली गई लड़कियां
 पूरे ऑपरेशन के दौरान जानकारी होते ही देह व्यापारियों ने लाइट काट दी। लेकिन पुलिस अपने साथ लाइ टॉर्च के दम पर चप्पे-चप्पे को खंगालती रही।बंद कमरों और कोठों के ताले तोड़े गए। पुलिस ने अलग-अलग तहखानो़ से तस्करी के जरिए लाइ गई बंगाल की चार लड़कियों को बरामद किया। पुलिस ने माल का बाजार, कश्मीरी बाजार और सेब का बाजार के हर कोठे में जाकर तलाशी ली। पुलिस उस एक बंगाली लड़की को ढूंढ रही थी और उन्हें खरीद कर लाई हुई, तीन और लड़किया मिलीं। लड़कियों की पहचान को गुप्त रखते हुए उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने का इंतजाम पुलिस कर रही है।
150 पुलिसवालों ने 6 घंटे तक चलाया ऑपरेशन
 एएसपी अपर्णा सिंह ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम, एंटी रोमियो की महिला सिपाही, सर्विलांस एसओजी और कई थानों की फोर्स समेत करीब 150 पुलिस कर्मियों की सहायता से ऑपरेशन को सफल बनाया गया।इस दौरान आसपास जितनी भी जगह पहले या अब इस तरह के कोठे चलते थे, हर जगह तलाशी ली गई। सबसे पहले एंटी रोमियो की महिला सिपाही सिविल ड्रेस में परेशान बन कर वहां पहुंची। जिसे कोठे वालों ने तुरंत मदद के बहाने कैद करने की कोशिश की। लेकिन कुछ ही देर में उनके सामने पूरा सच आ गया।
माहौल देख तमतमा गई थी आईपीएस
आईपीएस अपर्णा सिंह ने बताया कि जब तहखाने में जानवरों की तरह कैद लड़कियां दिखाई दीं, तो वो उन्हें बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कोठा संचालकों से सख्त रवैया अपनाया और पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी की बात नहीं सुनी। हालांकि ज्यादातर महिलाएं वहां अपनी मर्जी से थीं और करीब बीस-बीस साल से इस धंधे से जुड़ी हुई थीं। उनका ये काम छोड़ने का भी कोई मन नहीं था।
दोबारा हुआ ऐसा तो होगी कार्रवाई
एसपी सिटी अनुपम सिंह ने कहा कि मानव तस्करी बहुत ही बड़ा जुर्म है। यहां बार-बार इस तरह की गतिविधि शुरू होने को हमने गंभीरता से लिया है। अब संबंधित थाना और चौकी को जिम्मेदारी दी जाएगी, अगर दोबारा ऐसा हुआ तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
ताजमहल की नींव के साथ ही शुरू हुआ था बाजार
इतिहासकारों की मानें तो ताजमहल की नींव डालते ही मुगलों ने बेड़ि‍या (नट) जाती के लोगों को यहां बसाया था। ये लोग उस समय काम के बाद थके मजदूरों को नाच गाना दिखा कर बहलाया करते थे। ज्यादातर मजदूर अकेले थे, इसलिए कुछ बेड़िया परिवारों ने देह व्यापार का काम भी शुरू कर दिया। उस समय से अब तक यहां ये काम होता रहा है।मुंबई में बार बंद होने के बाद यहां से मानव तस्करी कम हुई थी, क्योंकि काफी महिलाएं अपनी मर्जी से यहां आ गई थीं। लेकिन अब ज्यादा पैसे के लिए बाहर से छोटी उम्र की लड़कियां तस्करी के जरिए लाई जाती हैं

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