जाधव को 90 दिन में फांसी दे सकता है पाकिस्तान

नई दिल्ली
इंडियन नेवी के पूर्व अफसर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। उन्हें 90 दिन में फांसी हो सकती है। पिछले साल जाधव के कथित कबूलनामे का एक वीडियो भी पाकिस्तान ने जारी किया था। जब इस 6 मिनट (358 सेकंड) के वीडियो की पड़ताल की तो उसमें 105 कट नजर आए। (आगे की स्लाइड में देखें वीडियो) कबूलनामे को देखकर ऐसा लग रहा था कि जाधव टेलीप्रॉम्प्टर पर बयान पढ़ रहे हों।शक है कि कुलभूषण को टाॅर्चर करके या फिर ड्रग्स देकर कुछ भी कहलवाया गया और वीडियो बनाया गया।'' एक और एक्सपर्ट कर्नल यूएस राठौर कहते हैं कि पाक मिलिट्री कोर्ट की कार्यवाही के दौरान इतना टॉर्चर किया जाता है कि वहां 90% लोग अपने गुनाह कबूल कर लेते हैं।
 वीडियो पर क्यों उठाए गए थे सवाल... 
 जाधव का वीडियो प्रोफेशनल इंटेरोगेशन जैसा नहीं था। ऐसा लगता था कि इसे अलग-अलग एंगल से कैमरे और लाइटिंग अरेंजमेंट कर प्लानिंग के तहत शूट किया गया।
वीडियो किसी इंटरव्यू की तरह लग रहा था। शायद इसे पाकिस्तान के किसी जर्नलिस्ट और कैमरामैन ने आईएसआई के सेफ हाउस में शूट किया।
 वीडियो में जाधव कहते हैं, ''मेरी एक्टिविटी एंटी नेशनल थी। मुझे ईरान बॉर्डर से पाकिस्तान की तरफ से पकड़ा गया।
ऐसे हुआ शक
 43वें सेकंड में जाधव ने पहली बार भारत का नाम लिया। 67वें सेकंड में लगा कि वे किसी टेलीप्रॉम्पटर से कबूलनामा पढ़कर बोल रहे हैं। 2 मिनट 34वें सेकंड में बलूचिस्तान का नाम लिया। इस दौरान उन्हें दो अलग-अलग एंगल से शूट किया गया। इसमें लाइटिंग का अरेंजमेंट दिख रहा है। 3 मिनट 53वें सेकंड के बाद पांच कट में जाधव ने 3 मार्च, 2016 को अपनी गिरफ्तारी के बारे में बताया। यह भी कहा गया कि लिप मूवमेंट के मुताबिक, ऑडियो ओवरलैप किया गया है। पाकिस्तान ने 12 महीने में 13 बार गुजारिश किए जाने के बावजूद भारतीय अफसरों को कुलभूषण से नहीं मिलने दिया।
ड्रग देकर कुछ भी कहलवा सकते हैं: एक्सपर्ट
पाकिस्तान ने इंडियन एम्बेसी के अफसरों को कुलभूषण से क्यों नहीं मिलने दिया? शक है कि उसे टाॅर्चर करके या फिर ड्रग्स देकर कुछ भी कहलवाया गया और इसका वीडियो बना लिया।अब हमारी सरकार पाकिस्तान पर दबाव डाले कि कुलभूषण को फांसी ना होने दें। इंटरनेशनल डिप्लोमैसी के जरिए इसे रुकवाएं। हम सार्क के जरिए भी दबाव बना सकते हैं।पाकिस्तान के पास कुलभूषण के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। अगर होते तो उन्हें भारत और दुनिया के सामने रखता। मैं चाहता हूं कि संसद में यह मुद्दा उठना चाहिए। सभी को एक सुर में इसका विरोध करना चाहिए।
 पाकिस्तान ऐसा इसलिए कर रहा है। ताकि अपनी आवाम को दिखा सके कि उनकी परेशानियों की असल वजह भारत है। लोगों को सरकार की ताकत दिखाने के लिए फांदी देना चाहते हैं।
पाक आर्मी कोर्ट में 90% आरोपी गुनाह कबूल कर लेते हैं: एक्सपर्ट
 जाधव के मामले पर रिटायर्ड कर्नल यूएस राठौर ने कहा, जाधव का ट्रायल मिलिट्री कोर्ट में हुआ, जो वहां बहुत बदनाम है। पिछले दिनों पाक मिलिट्री कोर्ट का एक डाटा आया था। इसके मुताबिक, वहां 90% लोग अपने गुनाह कबूल कर लेते हैं।
 वहां मिलिट्री कोर्ट के 274 केसों में से 161 केसों में फांसी दी गई। यानी 59% लोगों को फांसी दी गई। इस बारे में वकीलों और फांसी पाए लोगों को भी ये बाद में पता लगा कि उनके लोग अब दुनिया में नहीं हैं। पिछले दिनों तो एक नाबालिग को फांसी दी गई। इसका पाकिस्तान में विरोध भी हुआ था।”
कथित कबूलनामे में क्या था? 
 जाधव के मुताबिक, वे दिसंबर 2001 तक इंडियन नेवी में रहे। पार्लियामेंट अटैक के बाद डोमेस्टिक इंटेलिजेंस जुटाई। 2003 में इंडियन इंटेलिजेंस सर्विस ज्वाइन की। वे 2013 में रॉ में आए। ईरान के चाबहार इलाके में 10 साल पहले रॉ का बेस बनाया। कराची और बलूचिस्तान का दौरा किया। अफसर ने बताया कि उन्हें नेवी से 2022 में रिटायर होना था।
हुसैन मुबारक के नाम का पासपोर्ट
 पाकिस्तान ने आरोप लगाया था - "जाधव इंडियन नेवी का सर्विंग अफसर है। उसे सीधे रॉ चीफ हैंडल करते हैं। वो एनएसए के भी टच में है। आपका मंकी (जासूस) हमारे पास है। उसने वो कोड भी बताया है, जिससे वह रॉ से कॉन्टैक्ट करता था। जाधव अब भी इंडियन नेवी का अफसर है। वह 2022 में रिटायर होने वाला है।"
 एक पासपोर्ट (No. L9630722) भी जारी किया गया था। जिसके बारे में कहा गया था कि यह बलूचिस्तान में गिरफ्तार भारतीय शख्स का ही है।  पासपोर्ट में उसका नाम हुसैन मुबारक पटेल लिखा है। जन्मस्थान महाराष्ट्र का सांगली बताया गया है। पाकिस्तान ने उसके पास ईरान का वैध वीजा होने का भी दावा किया था।
पाक आर्मी ने फांसी के बारे में बताया
 पाकिस्तानी अफसर मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्विटर पर बताया कि पाकिस्तान आर्मी एक्ट के तहत जाधव का फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल (FGCM) किया गया और फांसी की सजा सुनाई गई।
 दूसरी ओर, भारत ने पाकिस्तान के हाईकमिश्नर अब्दुल बासित को दिल्ली में तलब किया। कहा- अगर, जाधव को फांसी दी जाती है तो ये सोचा समझा मर्डर कहलाएगा। इस बीच, भारत ने पाकिस्तान के 11 कैदियों की रिहाई रोक दी।
फैसले पर 90 दिन में अमल मुमकिन
पाकिस्तानी आर्मी एक्ट के तहत आए इस फैसले पर 90 दिनों के अंदर अमल होना तय है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा इसे मंजूरी दे चुके हैं। ऐसे में इसके खिलाफ अपील की कोई गुंजाइश नहीं रहती। ऐसे में जाधव को फांसी की सजा से बचाना मुश्किल होगा।
वीडियो को भारत ने खारिज किया था?
 जाधव के कबूलनामे वाले वीडियो पर फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा
वीडियो में यह शख्स (जाधव) जो बातें कह रहा है, उनमें कोई सच्चाई नहीं। उसने जो भी कहा, प्रेशर में कहा है। हालांकि, सरकार ने ये माना कि जाधव भारतीय नागरिक और नेवी में अफसर रह चुके हैं। फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा था, जाधव तक भारतीय एम्बेसी के किसी अफसर को पहुंचने नहीं दिया गया। जाधव कानूनी तौर पर ईरान में बिजनेस करता था। उसे कस्टडी में प्रताड़ित किया गया। ये शक है कि कहीं उसे ईरान से किडनैप तो नहीं किया गया? भारत ने एम्बेसी के अफसरों की जाधव से मुलाकात कराने की इजाजत मांगी थी। लेकिन पाकिस्तान ने भारत की मांग को ठुकरा दिया था।

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