पहले कहते थे देश से काला धन कितना गया, अब कहते हैं कितना आया: मोदी
नई दिल्ली.नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रपति के बजट
अभिभाषण पर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर चुटली ली।
उन्होंने कहा- ''कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में
असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार
राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। ...लेकिन आखिर
भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे। धमकी तो बहुत पहले सुनी
थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी।'' मोदी की स्पीच की बड़ी बातें...
मोदी ने ठीक सवा बाहर बजे अपनी स्पीच शुरू की।
- मोदी ने कहा, ''राष्ट्रपतिजी ने संसद के दोनों सत्रों को संबोधित किया। भारत जिस तेजी से बदल रहा है, देश की जनशक्ति का सामर्थ्य क्या है, गांव-गरीब-किसान की जिंदगी किस प्रकार से बदल रही है, उसका एक विस्तार से खाका उन्होंने सदन में रखा था। मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देने के लिए उपस्थित हुअा हूं। उनका ह्दय से आभार व्यक्त करता हूं।''
- ''मैं चर्चा में शरीक होने वाले सभी सदस्यों का अाभार व्यक्त करता हूं।''
- मोदी ने कहा, ''राष्ट्रपतिजी ने संसद के दोनों सत्रों को संबोधित किया। भारत जिस तेजी से बदल रहा है, देश की जनशक्ति का सामर्थ्य क्या है, गांव-गरीब-किसान की जिंदगी किस प्रकार से बदल रही है, उसका एक विस्तार से खाका उन्होंने सदन में रखा था। मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देने के लिए उपस्थित हुअा हूं। उनका ह्दय से आभार व्यक्त करता हूं।''
- ''मैं चर्चा में शरीक होने वाले सभी सदस्यों का अाभार व्यक्त करता हूं।''
राहुल पर चुटकी, कहा - कल भूकंप आया
- मोदी ने कहा, ''कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। ...लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे। धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी।''
- मोदी के इतना कहते ही अपोजिशन की ओर से हंगामा होने लगा। बता दें कि पिछले सेशन में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं। अगर वे बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा।
- विरोध कर रहे सांसद कल्याण बनर्जी से मोदी ने कहा, ''कल्याणजी आपका कल्याण होगा।''
- इसके बाद हंगामा और तेज हो गया। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें बीच में टोका और कहा कि कृपया प्रधानमंत्री की बात सुनें।
- मोदी ने आगे कहा, ''अादरणीय अध्यक्षा जी, मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्यों। जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, नम्रता का भाव देखता है तो सिर्फ मां नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है। तब जाकर भूकंप आता है। ...अौर इसलिए राष्ट्रपतिजी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्योरा दिया है।''
- मोदी ने कहा, ''कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति भावना व्यक्त करता हूं। केंद्र सरकार राज्यों के संपर्क में है। कुछ टीमें वहां पहुंच गई हैं। ...लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया। मैं सोच रहा था कि भूकंप आया कैसे। धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी।''
- मोदी के इतना कहते ही अपोजिशन की ओर से हंगामा होने लगा। बता दें कि पिछले सेशन में राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं। अगर वे बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा।
- विरोध कर रहे सांसद कल्याण बनर्जी से मोदी ने कहा, ''कल्याणजी आपका कल्याण होगा।''
- इसके बाद हंगामा और तेज हो गया। स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें बीच में टोका और कहा कि कृपया प्रधानमंत्री की बात सुनें।
- मोदी ने आगे कहा, ''अादरणीय अध्यक्षा जी, मैं सोच रहा था कि भूकंप आया क्यों। जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, नम्रता का भाव देखता है तो सिर्फ मां नहीं, धरती मां भी दुखी हो जाती है। तब जाकर भूकंप आता है। ...अौर इसलिए राष्ट्रपतिजी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्योरा दिया है।''
मल्लिकार्जुन खडगे के बहाने आपातकाल का जिक्र
- मोदी ने कहा, ''हम ये जानते हैं कि जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुनजी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्या शेर सुनाया। ''
- ''बहुत बड़ी कृपा की अापने देश पर कि लोकतंत्र बचाया। कितने महान लोग हैं आप। लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भांति जानता है। पूरा लाेकतंत्र को आहूत कर दिया गया है।''
- ''75 का कालखंड, जब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था। जयप्रकाश बाबू समेत लाखों नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है। लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद यह जनशक्ति का सामर्थ्य था कि लोकतंत्र स्थापित हुआ। ये उस सामर्थ्य की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी प्रधानमंत्री बन सका।''
- मोदी ने कहा, ''हम ये जानते हैं कि जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल हमारे मल्लिकार्जुनजी कह रहे थे कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाए। वाह! क्या शेर सुनाया। ''
- ''बहुत बड़ी कृपा की अापने देश पर कि लोकतंत्र बचाया। कितने महान लोग हैं आप। लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भांति जानता है। पूरा लाेकतंत्र को आहूत कर दिया गया है।''
- ''75 का कालखंड, जब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था। जयप्रकाश बाबू समेत लाखों नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था। अखबारों पर ताले लगा दिए गए थे। उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है। लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद यह जनशक्ति का सामर्थ्य था कि लोकतंत्र स्थापित हुआ। ये उस सामर्थ्य की ताकत है कि गरीब मां का बेटा भी प्रधानमंत्री बन सका।''
अपने ऊपर हुई आपत्तिजनक टिप्पणी का दिया जवाब
-
मोदी ने कहा, ''चंपारण सत्याग्रह शताब्दी का वर्ष है। इतिहास किताबों में
रहे तो समाज को प्रेरणा नहीं देता। हर युग में इतिहास को जानने और जीने का
प्रयास आवश्यक होता है। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या
नहीं थे... औराें के कुत्ते हो सकते हैं। ...हम कुत्तों वाली परंपरा में
पले-बढ़े नहीं हैं।''
- ''लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे, जब कांग्रेस पार्टी का जन्म नहीं हुआ था। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था। सभी ने मिलकर लड़ा था। सम्प्रदाय की भेद-रेखा नहीं था। तब भी कमल था, आज भी कमल है।''
- बता दें कि कांग्रेस की ओर से मोदी के बारे में कल एक टिप्पणी की गई थी, जिसमें ‘कुत्ते’ शब्द का इस्तेमाल हुआ था। स्पीकर ने यह शब्द कार्यवाही से हटवा दिया था।
- मोदी ने आगे कहा, ''हम भले ही उस वक्त नहीं थे, लेकिन हमें देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है।''
- ''लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे, जब कांग्रेस पार्टी का जन्म नहीं हुआ था। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इस देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा था। सभी ने मिलकर लड़ा था। सम्प्रदाय की भेद-रेखा नहीं था। तब भी कमल था, आज भी कमल है।''
- बता दें कि कांग्रेस की ओर से मोदी के बारे में कल एक टिप्पणी की गई थी, जिसमें ‘कुत्ते’ शब्द का इस्तेमाल हुआ था। स्पीकर ने यह शब्द कार्यवाही से हटवा दिया था।
- मोदी ने आगे कहा, ''हम भले ही उस वक्त नहीं थे, लेकिन हमें देश के लिए जीने का सौभाग्य मिला है।''
लोगों ने छोड़ी सब्सिडी
- मोदी ने कहा, ''शास्त्रीजी की अपनी गरिमा थी। युद्ध के दिन थे। भारत विजय का भाव था। शास्त्रीजी ने अन्न त्यागने की बात कही थी। ज्यादातर सरकारों ने जन सामर्थ्य को पहचानना छोड़ दिया है। लोकतंत्र के लिए यही सबसे बड़ा चिंता का विषय है। मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, वे गैस की सब्सिडी छोड़ दें।''
- ''2014 में एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि 9 सिलेंडर देंगे या 12 देंगे। हमने कहा कि अफोर्ड करने वाले सब्सिडी छोड़ दें। सिर्फ कहा था। इस देश के 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आए।''
- मोदी ने कहा, ''शास्त्रीजी की अपनी गरिमा थी। युद्ध के दिन थे। भारत विजय का भाव था। शास्त्रीजी ने अन्न त्यागने की बात कही थी। ज्यादातर सरकारों ने जन सामर्थ्य को पहचानना छोड़ दिया है। लोकतंत्र के लिए यही सबसे बड़ा चिंता का विषय है। मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, वे गैस की सब्सिडी छोड़ दें।''
- ''2014 में एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि 9 सिलेंडर देंगे या 12 देंगे। हमने कहा कि अफोर्ड करने वाले सब्सिडी छोड़ दें। सिर्फ कहा था। इस देश के 1 करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आए।''
चाफेकर बंधुओं-सावरकर का जिक्र किया, गांधीजी की भी बात कही
- प्रधानमंत्री ने कहा, ''आपमें से कोई ऐसा नहीं है जो आने वाला कल बुरा देखना चाहता है। मैं लाल किले से बोल चुका हूं कि अब तक जितनी सरकारें आईं, जितने प्रधानमंत्री आए, उनका अपना-अपना योगदान रहा है। उस तरफ बैठने वालों के मुंह से यह सुनने को नहीं मिला कि चाफेकर बंधुओं ने कभी कुर्बानी दी, कभी वीर सावरकर ने कालापानी की सजा काटी, कभी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद ने जान दी। उन्हें तो लगता है कि समस्या की जड़ यहां हैं।''
- ''हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि अमंत्रम् अक्षरं नास्ति। यानी कोई अक्षर ऐसा नहीं होता, जिसे मंत्र में जगह पाने की ताकत ना हो। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसमें समाज में योगदान देने की ताकत ना हो। योजक की जरूरत होती है। इस सरकार ने हर जनशक्ति काे जोड़ने का प्रयास किया है।''
- ''गांधीजी कहते थे- आजादी से पहले कुछ पाना है तो स्वच्छता पानी है। हम यही बात आपके सामने लेकर आए। क्या कभी संसद में स्वच्छता विषय पर चर्चा तक हुई थी? और इसलिए पहली बार यह सरकार आने के बाद चर्चा हुई। क्या स्वच्छता को भी हम राजनीति के एजेंडे का विषय बनाएंगे?''
- प्रधानमंत्री ने कहा, ''आपमें से कोई ऐसा नहीं है जो आने वाला कल बुरा देखना चाहता है। मैं लाल किले से बोल चुका हूं कि अब तक जितनी सरकारें आईं, जितने प्रधानमंत्री आए, उनका अपना-अपना योगदान रहा है। उस तरफ बैठने वालों के मुंह से यह सुनने को नहीं मिला कि चाफेकर बंधुओं ने कभी कुर्बानी दी, कभी वीर सावरकर ने कालापानी की सजा काटी, कभी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद ने जान दी। उन्हें तो लगता है कि समस्या की जड़ यहां हैं।''
- ''हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि अमंत्रम् अक्षरं नास्ति। यानी कोई अक्षर ऐसा नहीं होता, जिसे मंत्र में जगह पाने की ताकत ना हो। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं होता जिसमें समाज में योगदान देने की ताकत ना हो। योजक की जरूरत होती है। इस सरकार ने हर जनशक्ति काे जोड़ने का प्रयास किया है।''
- ''गांधीजी कहते थे- आजादी से पहले कुछ पाना है तो स्वच्छता पानी है। हम यही बात आपके सामने लेकर आए। क्या कभी संसद में स्वच्छता विषय पर चर्चा तक हुई थी? और इसलिए पहली बार यह सरकार आने के बाद चर्चा हुई। क्या स्वच्छता को भी हम राजनीति के एजेंडे का विषय बनाएंगे?''
मोदी ने बताया- बजट की तारीख क्यों बदली?
- मोदी ने कहा, ''एक चर्चा यह आई कि बजट जल्दी क्यों पेश किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। कृषि की ज्यादातर स्थिति दीपावली तक पता चल जाती है। हमारे देश की कठिनाई है कि अंग्रेजों की छोड़ी विरासत को लेकर चल रहे हैं। हम मई में बजट की प्रक्रिया से पार निकलते हैं। एक जून के बाद बारिश आती है। तीन महीने बजट का इस्तेमाल नहीं हो पाता। काम करने का समय कब बचता है। जब समय आता है तो दिसंबर से मार्च तक जल्दबाजी में काम होते हैं।''
- ''बजट पहले शाम 5 बजे पेश होता था। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि यूके के टाइम के हिसाब से अंग्रेज यहां बजट पेश करते थे। घड़ी उल्टी पकड़ते हैं तो लंदन का टाइम दिखता है। ऐसा इसलिए दिखाया क्योंकि कई लोगों को कई चीजें समझ नहीं आतीं।''
- मोदी की इस बात पर कांग्रेस के सदस्य भी हंसने लगे।
- मोदी ने आगे कहा, ''जब अटलजी की सरकार आई तो समय बदला गया। जब आपकी (यूपीए) सरकार थी तो आपने भी कमेटी बनाई थी। आप भी चाहते थे कि वक्त बदलना चाहिए। आपके वक्त के प्रपोजल को ही हमने पकड़ा। आप नहीं कर पाए। आपकी प्रायाेरिटी अलग थी। आपको बड़े गर्व से कहना चाहिए। फायदा उठाइए ना कि ये हमारे समय हुआ था।''
- मोदी ने कहा, ''एक चर्चा यह आई कि बजट जल्दी क्यों पेश किया गया। भारत कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। कृषि की ज्यादातर स्थिति दीपावली तक पता चल जाती है। हमारे देश की कठिनाई है कि अंग्रेजों की छोड़ी विरासत को लेकर चल रहे हैं। हम मई में बजट की प्रक्रिया से पार निकलते हैं। एक जून के बाद बारिश आती है। तीन महीने बजट का इस्तेमाल नहीं हो पाता। काम करने का समय कब बचता है। जब समय आता है तो दिसंबर से मार्च तक जल्दबाजी में काम होते हैं।''
- ''बजट पहले शाम 5 बजे पेश होता था। ऐसा इसलिए होता था क्योंकि यूके के टाइम के हिसाब से अंग्रेज यहां बजट पेश करते थे। घड़ी उल्टी पकड़ते हैं तो लंदन का टाइम दिखता है। ऐसा इसलिए दिखाया क्योंकि कई लोगों को कई चीजें समझ नहीं आतीं।''
- मोदी की इस बात पर कांग्रेस के सदस्य भी हंसने लगे।
- मोदी ने आगे कहा, ''जब अटलजी की सरकार आई तो समय बदला गया। जब आपकी (यूपीए) सरकार थी तो आपने भी कमेटी बनाई थी। आप भी चाहते थे कि वक्त बदलना चाहिए। आपके वक्त के प्रपोजल को ही हमने पकड़ा। आप नहीं कर पाए। आपकी प्रायाेरिटी अलग थी। आपको बड़े गर्व से कहना चाहिए। फायदा उठाइए ना कि ये हमारे समय हुआ था।''
- ''रेलवे में भी एक बात समझें कि 90 साल
पहले जब रेल बजट आता था, तब ट्रांसपोर्टेशन का मोड रेलवे ही था। आज
ट्रांसपोर्टेशन बड़ी अनिवार्यता है। इसके कई मोड हैं। इसलिए मुख्यधारा में
रेलवे व्यवस्था रहेगी। लेकिन सोचने के लिए सरकार ने कॉम्प्रिहेंसिव तरीके
से सोचा है। पहले बजट में गौड़ाजी ने बताया था कि करीब 1500 घोषणाएं हुई
थीं। लोगों को खुश रखने के लिए एलान होते थे। 1500 घोषणाओं को कागज पर ही
मोक्ष प्राप्त हो गया था। ऐसी चीजें ब्यूरोक्रेसी को सूट करती थीं। हमने ये
बंद किया।''

Comments
Post a Comment