UP के 3rd फेज में बड़े नेताओं को गढ़ बचाने की चुनौती, जानें 12 जिलों का गणित

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के थर्ड फेज के चुनाव में 12 जिलों की 69 सीटों पर 19 फरवरी को चुनाव होने हैं। इसमें 826 कैंडिडेट्स की किस्मत का फैसला होगा। इनमें कुछ ऐसे जिले भी हैं, जिन्हें कभी किसी पार्टी का गढ़ भी कहा जाता था। 2012 तक के चुनावों में कुछ ने अपने गढ़ बचाए रखे तो किसी ने गवां दिए। अब एक बार फिर सपा, बीजेपी और बीएसपी अपने-अपने गढ़ बचाने के लिए
- फर्रुखाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मैनपुरी, कन्नौज, इटावा, औरैया, कानपुर, उन्नाव, सीतापुर, बाराबंकी और लखनऊ।
2012 में किसके पास कितनी सीट
- सपा में 55, बीएसपी में 6, कांग्रेस में 2 और बीजेपी की छह।
2007 में 72 सीट पर पार्टियों की पोजिशन
- 29 सपा, 32 बीएसपी, 8 बीजेपी, 2 कांग्रेस और एक निर्दलीय के पास सीट थी।
# हरदोई
- हरदोई सपा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी नरेश अग्रवाल का गढ़ माना जाता रहा है।
- 2012 का चुनाव जीतने के बाद एक बार फिर नरेश के बेटे नितिन अग्रवाल हरदोई सदर से चुनाव में उतरे हैं।
- 2002 में सपा के पास 9 सीटों में से 4 सीटें थीं, जबकि बीएसपी 3 और बीजेपी के पास 2 सीट थीं।
- 2007 में सपा के पास सिर्फ 1 सीट थी। जिसपर नरेश अग्रवाल खुद चुनाव लड़े थे, जबकि बीएसपी ने 8 सीटें जीती थीं।
- परिसीमन के बाद 2012 में हरदोई में 8 सीट बचीं। इनमें सपा ने 6 सीटें जीतीं, जिनमें से एक सीट पर नरेश के बेटे नितिन भी थे। वहीं बीएसपी ने 2 सीटें जीती थीं।
- इस बार भी नरेश अग्रवाल के लिए चुनौती है।

# मैनपुरी, कन्नौज, औरैया और इटावा
- इन 4 जिलों को पिछड़ी जाति की अधिक आबादी वाला माना और सपा का गढ़ कहा जाता है।
- 2012 में सपा ने इन 4 जिलों में सभी 13 सीटें जीत ली थीं। परिसीमन से पहले 2002 में जहां इटावा में 4 सीटों में से 3 सपा के पास थी तो 1 पर कांग्रेस जीती थी।
- वहीं 2007 में 3 सपा के पास रही और 1 पर बीएसपी ने जीत हासिल की।
- इसी तरह मैनपुरी में पहले 5 सीट थीं, जिनमें से 2002 में सपा के पास 2, बीजेपी के पास 2 और 1 बीएसपी के पास थी। 2007 में सपा के पास 3, बीएसपी 1 और बीजेपी के पास 1 थी।
- कन्नौज में 2002 में सपा के पास 2 और बीजेपी के पास 1 सीट थी। 2007 में सपा के पास 2 और बीएसपी के पास 1 सीट थी।
- इसी तरह औरैया में 2002 में बीएसपी के पास 3, जबकि 2007 में इनके पास 2 सीट रही। वहीं सपा के पास 1 सीट थी।
- कन्नौज से अखिलेश भी सांसद रह चुके हैं तो पिछले 2 बार से डिम्पल सांसद है।
- वहीं मैनपुरी से मुलायम के पोते तेज प्रताप सिंह यादव सांसद हैं। इसलिए यह जिले यादव परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई हैं।
- इटावा में जहां अखिलेश को बागियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं मुलायम सिंह इस सीट से 7 बार और शिवपाल सिंह यादव 5 बार विधायक रह चुके हैं।

# लखनऊ
- लखनऊ को बीजेपी का गढ़ कहा जाता रहा है। यहीं से अटल बिहारी वाजपेयी 5 बार बीजेपी से सांसद रहे हैं।
- उनके बाद उनकी विरासत लालजी टंडन और राजनाथ सिंह ने संभाली। इसके बावजूद 2012 में बीजेपी का प्रदर्शन काफी दयनीय रहा।
- 9 सीटों में से बीजेपी सिर्फ एक सीट जीत पाई थी, जबकि 7 सपा और 1 पर कांग्रेस जीती थी।
- लखनऊ कैंट विधानसभा सीट 1991 से लगातार 5 बार बीजेपी के पास रही, लेकिन 2012 में यह सीट कांग्रेस के पास चली गई थी।
- 2007 में परिसीमन से पहले 8 सीटें थीं, जिनमें 4 बीजेपी, 1 सपा और 2 बीएसपी और एक इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के पास थी।
- वहीं 2002 में 4 बीजेपी, 1 सपा, 1 बीएसपी और 2 निर्दलीय के पास 1 सीट थी।
- अब लखनऊ में एक बार फिर बीजेपी के साथ-साथ देश के एग्रीकल्चर मिनिस्टर राजनाथ सिंह के लिए बीजेपी का गढ़ बचाने की चुनौती है।
# बाराबंकी
- इस जिले को कभी सपा के बागी विधायक बेनी प्रसाद वर्मा का गढ़ कहा जाता था।
- दरअसल, यहां कुर्मी वोट बड़ी संख्या में हैं। बेनी अपने बेटे को भी एक बार विधायक बना चुके हैं।
- बाराबंकी की हैदरगढ़ सीट से 2002 में राजनाथ सिंह चुनाव जीतकर सीएम भी बन चुके हैं।
- 2012 में यहां पर सपा के पास 5 और बीजेपी को 1 सीट मिली थी, जबकि परिसीमन से पहले 8 सीटें थीं।
- 2002 में बीजेपी को 4, सपा को 3 और बीएसपी को 1 सीट मिली थी, जबकि 2007 में सपा को 3 और बीएसपी को 5 सीटें मिलीं।
- सीएम अखिलेश के करीबी कैबिनेट मंत्री अरविन्द सिंह गोप बाराबंकी के रामनगर से चुनाव लड़ रहे हैं।

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