मालदीव एक आईलैंड सऊदी अरब को बेचने की तैयारी में, बढ़ सकती है भारत की चिंता
नई दिल्ली. मालदीव अपने एक आईलैंड का कंट्रोल सऊदी अरब को देने
का प्लान बना रहा है। मालदीव इंडियन ओशन में पड़ोसी है, लिहाजा इस फैसले
से भारत के सामने सिक्युरिटी से जुड़ी एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है।
मालदीव के अपोजिशन का कहना है कि इस फैसले के बाद यहां वहाबी सोच बढ़ेगी और
देश के स्कूल मदरसों में बदल जाएंगे।
- मीडिया रिपोर्ट ने मालदीव की अपोजिशन मालदीवियन डेमोक्रैटिक पार्टी (एमडीपी) के हवाले से यह जानकारी दी है।
- एमडीपी ने कहा है कि देश के 26 आईलैंड्स में से एक फाफू को सऊदी अरब को बेचने का फैसला खतरनाक साबित हो सकता है।
- पार्टी का मानना है कि इससे देश में वहाबी सोच को बढ़ावा मिलेगा।
- बता दें कि सीरिया में लड़ रहे दूसरे देश के फाइटर्स में मालदीव की बड़ी हिस्सेदारी है।
- मीडिया रिपोर्ट ने मालदीव की अपोजिशन मालदीवियन डेमोक्रैटिक पार्टी (एमडीपी) के हवाले से यह जानकारी दी है।
- एमडीपी ने कहा है कि देश के 26 आईलैंड्स में से एक फाफू को सऊदी अरब को बेचने का फैसला खतरनाक साबित हो सकता है।
- पार्टी का मानना है कि इससे देश में वहाबी सोच को बढ़ावा मिलेगा।
- बता दें कि सीरिया में लड़ रहे दूसरे देश के फाइटर्स में मालदीव की बड़ी हिस्सेदारी है।
यह फैसला स्कूलों को मदरसों में बदल देगा: एमडीपी
- सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद जल्द ही मालदीव दौरे पर जाने वाले हैं।
- एमडीपी के मेंबर और पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने कहा कि सरकार ने यह जानना भी जरूरी नहीं समझा कि लोग इस फैसले पर क्या सोचते हैं।
- एमडीपी के मेंबर और पूर्व विदेश मंत्री अहमद नसीम ने कहा कि सरकार ने यह जानना भी जरूरी नहीं समझा कि लोग इस फैसले पर क्या सोचते हैं।
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एमडीपी के मुताबिक, "सऊदी अरब मालदीव में 300 स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देता
है। यहां की 70% आबादी वहाबी पंथ अपना चुकी है। प्रेसिडेंट अब्दुल्ला
यामीन सऊदी अरब से इस्लामिक टीचर्स लाना चाहते हैं। फैसला स्कूलों को
मदरसों में बदल देगा।"
मालदीव के मामलों में भारत नहीं देना चाहता दखल
- भारत के पड़ाेस में मालदीव इकलौता ऐसा देश है, जहां जाने से नरेंद्र मोदी पीएम बनने के बाद से अब तक परहेज करते नजर आए हैं।
- भारत मालदीव के अंदरूनी मामलों से खुद को अलग रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, अब भारत को मालदीव पर कोई साफ रुख तय करना होगा, क्योंकि वहां अगले साल चुनाव हो सकते हैं।
- भारत के पड़ाेस में मालदीव इकलौता ऐसा देश है, जहां जाने से नरेंद्र मोदी पीएम बनने के बाद से अब तक परहेज करते नजर आए हैं।
- भारत मालदीव के अंदरूनी मामलों से खुद को अलग रखने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, अब भारत को मालदीव पर कोई साफ रुख तय करना होगा, क्योंकि वहां अगले साल चुनाव हो सकते हैं।
पहले जमीन बेचने पर मिलती थी मौत की सजा
- मालदीव में पहले जमीन बेचने को गद्दारी माना जाता था था। इसके लिए मौत की सजा दी जाती थी।
- बता दें कि मालदीव की सरकार ने 2015 में संविधान में संशोधन किया, जिसके बाद वहां विदेशियों का जमीन खरीदना मुमकिन हो सका।
- बता दें कि मालदीव की सरकार ने 2015 में संविधान में संशोधन किया, जिसके बाद वहां विदेशियों का जमीन खरीदना मुमकिन हो सका।
कौन होते हैं वहाबी?
- वहाबी सुन्नी मुस्लिम हैं, जिन्हें काफी कट्टर माना जाता है।
- सऊदी अरब के नज्द शहर के अब्दुल वहाब नज्दी ने 17th सेंचुरी में वहाबी पंथ की बुनियादी डाली थी।
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भारत में भी वहाबी विचारधारा को मानने वाले लोग हैं। उत्तर प्रदेश में
सहारनपुर जिले के देवबंद में इसका हेडक्वार्टर है। इसलिए यहां वहाबियों को
देवबंदी कहा जाता है। भारत में वहाबियों को तब्लीगी जमात के नाम से भी जाना
जाता है।

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