मेरी मां भारत में जज नहीं बन सकीं क्योंकि वह महिला थीं: US डिप्लोमैट निक्की हेली

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क : यूनाइटेड नेशन्स में अमेरिका की एम्बेसडर निक्की हेली ने कहा है कि महिला होने की वजह से उनकी मां को भारत में जज नहीं बनने दिया गया। निक्की हेली ने फॉरेन रिलेशन काउंसिल की एक मीटिंग में महिलाओं की भूमिका से जुड़े एक सवाल पर यह कहा।

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक यह मीटिंग बुधवार को हुई। इस दौरान निक्की हेली ने कहा, "मेरी मां लॉ स्कूल जाने के काबिल थीं और वह भारत की पहली फीमेल जजों में से एक हो सकती थीं, लेकिन महिला होने के नाते उन्हें उस जगह पहुंचने की इजाजत नहीं मिली।"
- "लेकिन उनके (मां) लिए अपनी बेटी को साउथ कैरोलिना की गवर्नर और फिर यूएन में अमेरिका की एम्बेसडर के तौर पर देखना अमेजिंग है।"
1960 में अमेरिका गए थे निक्की के पेरेंट्स
- निक्की हेली के पेरेंट्स अजीत सिंह और राज कौर रंधावा 1960 में भारत से अमेरिका गए थे। लेकिन इससे बीस साल पहले ही अन्ना चांडी त्रावणकोर में आजाद भारत की पहली महिला जज बन गई थीं। चांडी 1948 में प्रमोट होकर डिस्ट्रिक्ट जज बनी थीं। 1959 में वे हाईकोर्ट की जज भी बनीं।
कौन हैं निक्की हेली?
- 45 साल की निक्की ने ट्रेड और लेबर इश्यू पर काफी काम किया है। साउथ कैरोलिना की इंडो-अमेरिकन गवर्नर रहीं निक्की हेली के यूएन में अप्वाइंटमेंट को इस साल जनवरी में ही अमेरिकी सीनेट की मंजूरी मिली थी।
- निक्की ने पिछले साल प्रेसिडेंशियल इलेक्शन कैम्पेन के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध किया था। हालांकि, बाद में उन्होंने ट्रम्प का सपोर्ट किया। नेशनल सिक्युरिटी और अमेरिकन आर्मी पर निक्की के विचार रिपब्लिकन पार्टी की सोच से मेल खाते हैं।

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